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तालिबान 2.0

  ” हम इस्लाम के पवित्र उपदेशों को ही अपना सर्वस्व समझते हैं । ” – मुल्ला हसन अखुन्द । आतंक की इस अंतरिम सरकार के गठन हेतु केवल और केवल अमेरिका जिम्मेदार है । मन्त्री बने अधिकांश आतंकी अमेरिकी जेलों में बन्द थे । क्यूबा के खतरनाक ”  ग्वांतनामो बे  ” जेल में बन्द थे । पाकिस्तान व अफगानिस्तान की जेलों में बन्द थे । इस सभी कुख्यात आतंकियों को केवल इसलिए रिहा किया गया ताकि अमेरिकी – तालिबानी वार्ता हो सके । अमेरिका – तालिबान समझौता हो सके । अमेरिका ने इस वार्ता में उस देश को ही शामिल नहीं किया जिस देश से समझौता होना था । यह वार्ता अफगानिस्तान के बिना पूरी हो गई । अमेरिकी प्रशासन इस दिशा में वर्ष 2012 से ही प्रयास कर रहा था और इसी सिलसिले में उन तमाम खूंखार आतंकियों को वर्ष 2012 तक छोड़ दिया गया । अमेरिका ने जिस ” जलमय खलीलजाद ” को शांति दूत नियुक्त किया, वह शांति दूत नहीं बल्कि अपने मातृभूमि अफगानिस्तान सहित सम्पूर्ण विश्व के लिए अशांति का सूचक बन गया । आतंकियों के इस 33 सदस्यीय अन्तरिम सरकार में केवल आतंक ही आतंक है, फिर इस अन्तरिम सरकार में अफगानिस्तान के प्रतिनिधित्व, महिला...